keshavkumar
Monday, 9 April 2018
Tuesday, 18 March 2014
हमारे विचार ऐसा होना चाहिए
ऐसा मत सोचो कि जो लोग तुम्हारी बात सुनकर सहमत हो जाते हैं कि तुम कष्ट में हो, वे तुम्हारे मित्र हैं| जो लोग तुम्हारी नकारात्मक भावनाओं या निराशाओं को बढ़ावा देते हैं वे मित्र प्रतीत होते हैं पर वे बुरी संगत हैं| सुसंगति या अच्छे मित्र तुम्हें यह अनुभव कराते हैं कि समस्या कुछ भी नहीं है - "यह तो सरल सी बात है, चिंता मत करो|" वे तुममें उत्साह भर देते हैं|
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